5 रुपए जेब में आने के बाद खुद को राजा समझने लगा था ये एक्‍टर

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फाइल फोटो
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शाहजहांपुर: एक्‍टर राजपाल यादव अब एक्टिंग से पॉलिटिक्‍स में इंट्री करने जा रहे हैं। उन्‍होंने एक नई पार्टी बनाई है, जिसे सर्व संभाव पार्टी नाम दिया है। 175 से ज्यादा फिल्मों में काम कर लोगों के दिलो में जगह बनाने वाले राजपाल की लाइफ के काफी इंट्रेस्टिंग किस्‍से हैं।आज आपको राजपाल से बात करके उन्‍हीं के कुछ किस्‍सों से रूबरू कराया जा रहा है।

  जब राजपाल के लिए पिता ने कहा था- मजदूरी करके फालतू पैसे खर्च नहीं कर सकते

 

– राजपाल यादव यूपी के शाहजहांपुर के बड़ा थाना क्षेत्र के रहने वाले रहने वाले हैं।

– पिता नौरंग यादव खेती करते हैं। राजपाल 6 भाई हैं।

– अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए वह कहते हैं, उस समय गांव में एक भी पक्‍का घर नहीं था, मैं दोस्‍तों के साथ गडढ़ों में भरे गंदे पानी में खेलता था।

– एक बार मैं स्‍कूल का होमवर्क करके नहीं गया था, जिसके लिए मास्‍टर जगदीश श्रीवास्‍तव ने एक पतली लकड़ी से मेरी पिटाई की।

– कुछ दिन बाद पिता स्‍कूल पहुंचे और प्रिंसिपल से कहा- अगर राजपाल अपनी मेहनत से एग्‍जाम में पास होता है तो ठीक, नहीं तो इसे पास न करना। अगर ये पढ़ना चाहता है तो ठीक, नहीं तो हम मजदूरी करके फालतू पैसे खर्च नहीं कर सकते।

– हालांकि, इसके बाद पिता ने मेरा गांव से दूर शहर के सरदार पटेल स्‍कूल में एडमिशन करवा दिया।

– आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के बावजूद वो मुझे पढ़ा-लिखाकर बड़ा इंसान बनाना चाहते थे।

5 रुपए जेब में आने के बाद खुद को समझ रहा था राजा

 

– राजपाल कहते हैं, शहर स्‍कूल जाने के लिए मेरी सवारी ट्रक होती थी।

– एक बार शहर से घर लौट रहा था, साथ में बड़े भाई श्रीपाल यादव भी थे। देर हो जाने पर कोई सवारी नहीं मिल रही थी।

– उस समय मैं 65 किलोमीटर साइकिल चलाकर घर पहुंचा था। वो दिन आज भी मुझे याद है।

– एक समय मेरे पास बिल्‍कुल पैसे नहीं थे, जेब खाली थी। बड़े भाई के पास एक रुपया था।

– हम स्‍टेशन के पास से गुजर रहे थे, वहां मेरी नजर बिक रही लाॅटरी पर पड़ी।

– मैंने भईया से एक रुपए लिए और उससे लॉटरी खरीद ली। इसपर भाई ने मुझे काफी सुनाया भी था।

– दूसरे दिन जब मैं स्कूल के लिए शहर आया, तो लाॅटरी वाले के पास गया। मेरा 65 रुपए का इनाम निकला।

– इसके बाद मैंने 65 रुपए लेकर 10 रुपए के टिकट और लिए। 5 रुपए अपने पास रखकर 50 रुपए भईया को दे दिए।

– 5 रुपए जेब में आने के बाद मैं खुद को राजा समझ रहा था। लेकिन भाई ने कहा, आज के बाद लाॅटरी नहीं खरीदना।

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