Home India News सीएचसी रूधौली में विशाल मानसिक जागरुकता शिविर का आयोजन–

सीएचसी रूधौली में विशाल मानसिक जागरुकता शिविर का आयोजन–

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आलोक बरनवाल-रुधौली बस्ती

 

राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रुधौली में मानसिक रोग स्वास्थ्य शिविर के आयोजन किया गया । जिसका मुख्य अतिथि उपजिलाधिकारी आनंद श्रीनेत ने फीता काटकर उद्घाटन किया और वहां उपस्थित डॉक्टरों को बुके देकर सम्मानित किया । शिविर में दूर-दूर से आए मरीजों ने अपना निशुल्क जांच कराया। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी अशोक चौधरी ने बताया कि घर में किसी भी व्यक्ति के व्यवहार में परिवर्तन नजर आये, हर समय परेशान दिखे, बेवजह गुस्सा करे तो उसे मनोचिकित्सक को दिखाना चाहिए। यह सभी लक्षण मानसिक अस्वस्थता के लक्षण हैं।

प्रभारी अधीक्षक अशोक चौधरी के नेतृत्व में मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत गुरुवार को मेगा मानसिक स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का शुभारंभ मनोचिकित्सक ए के दुबे ने शिविर मे आये लोगों को मानसिक रोग, उसके लक्षण और बचाव के बारे में जानकारी दी गयी।

मनोचिकित्सक डॉ हरितोष गुप्ता ने बताया- डिप्रेशन, चिन्ता, बाइपॉलर डिसऑर्डर, सिजोफ्रेनिया, आटिज्म, मंदबुद्धि, लर्निंग डिसेबिलिटी, मिर्गी, नशे की लत व अन्य बीमारी के लक्षण नींद न आना, मन का उदास रहना, बार-बार हाथ धोना, अपने आप से बड़बड़ाना, बेवजह शक करना, कार्य करने में रुचि कम होना, पढ़ाई लिखाई में परेशानी, दैनिक कार्यों के लिए दूसरे पर निर्भर रहना आदि मानसिक अस्वस्थता के लक्षण हैं। उन्होंने कहा-इस तरह के लक्षण नजर आने पर तुरंत मनोचिकित्सक से परामर्श करना चाहिए। जिला अस्पताल बस्ती में मानसिक रोगियों के लिए ओपीडी की व्यवस्था है। वहां जाकर परामर्श लिया जा सकता है।

साइकेट्रिस्ट सोशल वर्कर डॉ राकेश कुमार ने बताया- मानसिक रोग भी शारीरिक रोगों की तरह होते हैं इनका उपचार संभव है। घर में बच्चे अथवा किसी सदस्य के व्यवहार में परिवर्तन नजर आये तो सतर्क हो जाना चाहिए। किसी भी सूरत में झाड़ फूंक के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए। रोगी को मनोचिकित्सक को दिखाना चाहिए। नियमित व्यायाम, योग, अपने विश्वास वाले लोगों से बात साझा करने से काफी हद तक मानसिक तनाव दूर हो जाता है। क्लीनिकल साइकेट्रिस्ट नर्स नीलम शुक्ला ने बताया -यदि परिवार के किसी भी सदस्य में मनोरोग के लक्षण नजर आते हैं तो मनोचिकित्सक से परामर्श करें। उन्होंने दिव्यांगता के बारे में जानकारी दी और बताया कि ऐसे लोगों के लिए दिव्यांग प्रमाण पत्र क्यों जरूरी है। उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल बस्ती में स्थित मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में प्रत्येक सोमवार को दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाए जाते हैं। उन्होंने यूडीआईडी साइट पर रजिस्ट्रेशन कर दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दी।

कम्युनिटी नर्स सत्यम मिश्रा ने बताया – मानसिक रोगी से किस तरह का व्यवहार किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया उनकी पूरी बात गंभीरता से सुननी चाहिए और उन्हें इस तरह का कोई माहौल नहीं देना चाहिए जिससे उन्हें तनाव हो।

शिविर में जिन लोगों में मानसिक रोग के लक्षण पाये उन्हें उचित उपचार व दवा उपलब्ध करायी गई। इसके अलावा लोगों के बीपी व शुगर की जांच की गई। करीब 200 लोगों ने शिविर का लाभ उठाया। शिविर में मनोचिकित्सक सर्जन डॉक्टर राजेश पटेल, डॉ एके कनौजिया, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ भावना गुप्ता सहित मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम उपस्थित रही। शिविर के आयोजन में ब्लाक प्रोग्राम मैनेजर हरीश का विशेष सहयोग रहा। आमजन मानसिक स्वास्थ्य सम्बन्धी चिकित्सकीय उपचार व परामर्श के लिए जिला चिकित्सालय बस्ती में सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक आने की सलाह दी। मानसिक समस्या हेतु परामर्श टेली मानस हेल्प लाइन नंबर 14416 पर संपर्क करने की सलाह दी | शिविर में मरीजों की ब्लड प्रेशर, मधुमेह की जांच की गई |

शिविर में कुल 210 मरीजों का रजिस्ट्रेशन किया गया जिसमें से मानसिक अस्वस्थता के 18 मरीज, मधुमेह के 4, हाइपरटेंशन के 8 मरीज पाए गए जिन्हें उचित परामर्श एवं दवा वितरण किया गया।

इस मौके पर टीम के साथ अन्य स्टाफ जगजीवन, प्रभाकर वर्मा, गिरजेश पाठक, अयूब खान,सुधीर शुक्ला, विजयधर द्विवेदी,काजी एहेतशाम हुसैन,राकेश द्विवेदी,जितेन्द्र शुक्ला,संजय पटेल, निधि राव आदि लोग मौजूद रहे।

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