Home India News आत्मदाह के लिए केरोसिन लेकर पहुंचा युवक, कलेक्ट्रेट में हंगामा —

आत्मदाह के लिए केरोसिन लेकर पहुंचा युवक, कलेक्ट्रेट में हंगामा —

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संदीप चौरसिया कुदरहा बस्ती

 

मुण्डेरवां थाना क्षेत्र के बेहिल गांव का एक युवक आज दिन में करीब 12.40 बजे कलेक्ट्रेट पर आत्मदाह करने पहुंच गया। इसकी जानकारी उसने 15 दिन पहले जिला प्रशासन को विज्ञप्ति के माध्यम से दिया था। पुलिस की सक्रियता से फिलहाल अनहोनी टल गयी, घटना के समय कलेक्ट्रेट में कोई जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी मौजूद नहीं था। कलेट्रेट के गेट पर हाथ में किरोसिन ऑयल का गैलन लेकर पहुंचे गंगाराम यादव ने जैसे ही अपने ऊपर किरोसिन जैसे ही माचिय निकालकर निकालकर आग लगाने की कोशिश की, मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उससे बलपूर्वक माचिस छीन लिया और उसे पकड़कर जिलाधिकारी कार्यालय के पीछे ले गये। यहां पुलिस ने उसकी कमीज उताकर कपड़े से किरोसिन साफ किया और हिरासत में लेकर पुलिस लाइन ले गई। आपको बता दें बेहिल ग्राम पंचायत के भ्रष्टाचार मामले को लेकर गंगाराम ने पूर्व में जिलाधिकारी से तमाम शिकायतें की।लेकिन नतीजा सिफर रहा। जांच के नाम पर सिर्फ लीपापोती और आरोपियों को संरक्षण देने में पूरा तंत्र जुटा रहा। यहां तक कि आत्मदाह की चेतावनी देने के बाद भी प्रशासन नींद से नही जागा और युवक खौफनाक कदम उठाने का दुस्साहस कर बैठा। गंगाराम की मानें तो आत्मदाह का डेडलाइन दिये जाने के बाद मामलों की जांच करने मनरेगा लोकपाल, डीपीआरओ मौके पर पहुंचे लेकिन जांच बेनतीजा रही। डीपीआरओ भी 24 नवम्बर को जांच के लिये बेहिल गांव में पहुंची। उन्होने हैंड पंप रिबोर और मरम्मत के नाम पर पैसा निकालने की शिकायत के बारे में जांच किया।उन्होने 8 हैंडपंपों की जांच की, 3 पर प्राइवेट नल की मुंडी लगी थी। गांव के लोगों ने कहा इन नलों का मरम्मत नही हुआ और न ये रिबोर कराये गये। मनरेगा एवं हैंडपंप मामले में किये गये फर्जीवाड़े की जांच मुख्य विकास अधिकारी ने जिला खादी ग्रामोद्योग अधिकारी को सौंपकर 30 नवम्बर तक रिपोर्ट मांगा था। समय सीमा बीत गई जांच रिपोर्ट उनके कार्यालय को नही मिली। गंगाराम का कहना है कि जिला खादी ग्रामोद्योग अधिकारी को 2 साल पहले भी खड़न्जा निर्माण में किये गये भ्रष्टाचार की जांच मिली थी, आज तक उनकी जांच पूरी नही हुई। उनसे क्या उम्मीद करें।

गंगाराम ने यह भी कहा जॉब कार्ड में किये गये फर्जीवाड़े की जांच में तहसीलदार ने पुरूष को महिला दिखाकर भ्रामक रिपोर्ट तैयार किया और सम्बन्धित से फर्जी शपथ पत्र भी ले लिया। मौजूदा अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों को संरक्षण दे रहे हैं और जांच के नाम पर शिकायतकर्ता को हतोत्साहित कर रहे हैं। वह जिलाधिकारी को इन सब का जिम्मेदार मानता है। आत्मदाह की कोशिश करते समय पुलिस द्वारा हिरासत में लिये जाने के बाद वह लगातार अपनी भड़ास निकालता रहा। वह जिलाधिकारी को इन सबके लिये जिम्मेदार मानता है। झूठी रिपोर्ट लगाने का आरोप लगाते हुये वह तहसीलदार को निलंबित किये जाने की भी मांग कर रहा था।

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