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लेखपाल के उत्पीड़न से दलित परिवार भुखमरी के कगार पर / निजीभूमि पर स्थगन आदेश के बावजूद भी महिला लेखपाल करा रही निर्माण–

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राजेश शुक्ल (बनकटी- बस्ती)

लालगंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत लेखपाल के उत्पीड़न के परिणाम स्वरूप आदर्श नगर पंचायत बनकटी का एक दलित परिवार भूखमरी के कगार पर पहुंच गया है। लेखपाल ने निजी भूमि पर खेत की बुवाई करने से मना कर दिया। और मौखिक आदेश की अवहेलना कर रवि की बुवाई करने पर एक एफ0 आई0 आर0 दर्ज कराने एवं बर्बाद करने की धमकी भी दी है। जिससे रबी की बुवाई का समय समाप्त होने को है।लेकिन दलित द्वारा निजी भूमि पर गेहूं की बुवाई भी नहीं की जा सकी। तथा उसी गाटा सं0 में अवैध निर्माण भी हो रहा है।

मामला आदर्श नगर पंचायत बनकटी के वार्ड संख्या 5 वशिष्ठी नगर का है। वार्ड के राजस्व ग्रामसभा बसौढी़ में गाटा संख्या 398 अभिलेखो में नवीन परती के रूप में दर्ज है।उक्त गाटे में अध्यापक वीरेंद्र कुमार पुत्र झीनक व मृतक, बाप-बेटे सहित 28 लोगों के पक्ष में वर्ष 2012 में पूर्व ग्राम पंचायत बसौढी़ की भूमि प्रबंधक समिति द्वारा किए गए प्रस्ताव पर दलितों के नाम आवासीय पट्टा किया गया था। उक्त पट्टे के करीब 9 वर्ष बाद पट्टे की भूमि के सीमांकन के लिए वीरेंद्र कुमार द्वारा प्रार्थना पत्र दिया गया। जिसके अनुपालन में क्षेत्रीय लेखपाल श्वेता शुक्ला ने किसी अन्य लेखपाल की मिलीभगत से बगैर आसपास के लोगों को बगैर सूचना दिए भूमि की पैमाइश किया। जिसमें राजस्व निरीक्षक पी० पी० गिरी की मौजूदगी भी जरूरी नहीं समझा गया! पैमाइश के समय गाटा संख्या 398 का हिस्सा गाटा संख्या 463 मे बता कर0.024 हेक्टेयर भूमि अध्यापक वीरेंद्र कुमार एवं उनके परिजनों के पक्ष में कर दी गई। मामले की जानकारी होने पर जब गाटा संख्या 463 के भूस्वामी सुरेश चंद्र पुत्र गया प्रसाद ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई तो संबंधित लेखपाल का पारा चढ़ गया। पैमाइश को आधार बनाकर जब वीरेंद्र कुमार द्वारा गाटा संख्या 463 के कथित 0.024 हेक्टेयर भूमि में निर्माण कार्य किया जाने लगा तो सुरेश चंद ने न्यायालय की शरण ली जिसमें मा0 सिविल जज जूनियर डी0 खलीलाबाद के न्यायालय से एक पक्षीय निषेधाज्ञा जारी कर प्रतिवादी को निषेधित कर दिया गया कि वादी के शांतिपूर्ण कब्जा का हस्तक्षेप प्रतिवादी ना करें। वादी सुरेश चंद्र द्वारा उक्त आदेश की प्रति जब लेखपाल श्वेता शुक्ला को दी गई तो उन्होंने झल्लाकर कहा मैंने पैमाइश कर दिया है। अब उसके निर्माण को ना तो तुम रोक पाओगे और न तुम्हारा न्यायालय एक बात और सुन लो अब खेत की बुवाई भी मत करना। अगर बात नहीं मानी और बुवाई किया तो तुम्हारे ऊपर एफ0 आई0आर0 दर्ज करा कर तुम्हें बर्बाद कर दूंगी।
लेखपाल के महिला व सरकारी मुलाजिम होने के कारण सुरेशचंद्र अपनी संक्रमणीय भूमि गाटा संख्या 463 गेहूं की बुवाई ना कर सका। लेखपाल की धमकी से त्रस्त सुरेश चंद का परिवार रबी की बुवाई ना होने की दशा में भुखमरी की कगार पर पहुंच गया है। दलित सुरेशचंद्र के पास खेती के लिए मात्र वही एक भूखंड है जिसके सहारे इनके पूरे परिवार का भरण-पोषण होता है/ सुरेशचंद्र और उनके परिवार के पास आय का कोई अन्य स्रोत भी नहीं है। मामले में एक महत्वपूर्ण प्रश्न यह भी है कि पट्टा स्वीकृत के समय ही पट्टा प्रमाण पत्र व कब्जा प्रमाण पत्र आवंटी को उपलब्ध करा दिया जाता है। फिर उक्त पटटेदार द्वारा 9 वर्ष तक किन कारणों से ना तो आवास निर्माण किया गया है /और ना ही पट्टे की भूमि पर कब्जा किए जाने की शिकायत ही किसी अधिकारी / कर्मचारी से की गई थी।
इस बावत हल्का लेखपाल श्वेता शुक्ला से जानकारी लेना चाहा लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ।

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