Home India News फार्मासिस्ट डिग्रीधारकों के दर्द की कहानी,फार्मेसी प्रोफेसर की जुबानी–

फार्मासिस्ट डिग्रीधारकों के दर्द की कहानी,फार्मेसी प्रोफेसर की जुबानी–

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इशिका गुप्ता-बस्ती

कोविड-19 के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए फार्मेसी प्रोफेसर ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह को प्रदेशभर के बेरोजगार फार्मासिस्ट डिग्री धारकों की याद आ गई जो पिछले डेढ़ दशक से नियुक्तियों की राह देख रहे हैं । वास्तव में फार्मेसी कानून को सही से लागू करने की ओर इशारा करते हुए लयबद्ध होकर ज्ञानेंद्र ने कहा कि फार्मेसी एक्ट को सही में लागू करवा दो सरकार डिग्री पड़ी बेकार गीत का सहारा लेते हुए सरकार की गलत नीतियों का विरोध किया और कहा कि जब फार्मासिस्ट डिग्री धारकों को नौकरी नहीं देनी है तो ये फार्मेसी कालेज क्यों खोल रखा है । अस्पतालों में दसवीं पास युवक युवतियों को रखा गया है जिसे सरकार से अनुबंध करके खुद सेवा प्रदाता कम्पनियों ने काम पर लगाया है जिसमें अधिकांश लोगों के पास आवश्यक योग्यता ही नहीं है । बस्ती के फार्मासिस्ट संगठन के जिला मीडिया प्रभारी सुरेन्द्र कुमार चौधरी ने बताया कि वर्ष 2002 से अबतक फार्मासिस्टों का चयन नहीं हुआ जिससे ये कोरोना संक्रमणकाल में भुखमरी के कगार पर हैं जिन्हें तत्काल रोजगार से जोड़ते हुए अस्पतालों में नियुक्ति दी जानी चाहिए ।
संगठन के जिलाध्यक्ष परमेंद्र कुमार ने फार्मेसी प्रोफेसर के द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार का ध्यान बेरोजगार फार्मासिस्टों की दुर्दशा की ओर आकृष्ट कराने के प्रयासों की सराहना की है ।

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