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सांसद हरीश द्विवेदी ने पीएम मोदी के पहल को सराहा

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बस्ती। मोदी सरकार ने बुधवार को कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री के अलावा केंद्रीय मंत्री समेत सभी सांसदों के वेतन में 30 फीसदी कटौती करने का फैसला लिया, जो एक अप्रैल से प्रभावी हो गई और यह अगले साल मार्च तक जारी रहेगी।
मीडिया प्रभारी नितेश शर्मा के द्वारा प्रेस को जारी विज्ञप्ति के माध्यम से सांसद हरीश द्विवेदी ने प्रधानमंत्री के इस निर्णय का सराहना किया है।कहा कि कोरोना वायरस का प्रकोप देशभर में फैलता जा रहा है। इस वायरस से लड़ने में आर्थिक मदद की दरकार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से मदद करने की अपील की है तो अब केंद्र सरकार ने इस संबंध में बड़ा फैसला करते हुए ऐलान किया है कि सभी सांसदों के वेतन में एक साल के लिए 30 फीसदी की कटौती की जाएगी। इसके अलावा सांसद निधि भी 2 साल के लिए स्थगित कर दी गई है। सांसद ने कहा सांसदों को सांसद निधि के तहत खर्च करने के लिए फिलहाल पांच करोड़ रुपए प्रति वर्ष मिलते है। अब इन रुपया का उपयोग देशवासियों को कोरोना संक्रमण से बचाव एवं इलाज के लिए खर्च किए जाएंगे।

कब हुई थी सांसद निधि की शुरुआत ?
सांसद हरीश ने बताया कि सांसद निधि यानी एमपीलैड स्कीम की शुरुआत भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव ने 1993 में की थी। इसके तहत तय किया गया था कि सांसदों को अपने निर्वाचन क्षेत्र में विकास कार्य कराने के लिए प्रतिवर्ष वित्तीय सहायता दी जाएगी। लोकसभा के सांसदों को उनके संसदीय क्षेत्र के विकास में खर्च करना होता है। राज्यसभा सांसद देश के किसी भी हिस्सें में विकास कार्य में इसकी अनुशंसा करने के लिए स्वतंत्र होते हैं।

संसद सत्र पारित होते ही पास होगा कानून
सांसद ने कहा कि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, सभी राज्यपाल और सांसद 1 साल तक अपने वेतन का 30 फ़ीसदी हिस्सा नहीं लेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस बात पर फैसला हुआ। इसमें तय किया गया कि इस फैसले को कार्य रूप देने के लिए एक अध्यादेश लाया जाएगा। बाद में जब संसद का सत्र शुरू होगा तो उसमें इस बारे में कानून पारित करा लिया जाएगा।

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