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क्या शहरों का लॉकडाउन, कोरोना को हराने के लिए काफी है ?

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WHO के एक्सपर्ट ने उठाया ब़ड़ा सवाल, यह रिपोर्ट लाखों-करोड़ों लोगों को पढ़ना चाहिए

कोरोना के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे भारत के कई राज्यों में लॉकडाउन का एलान किया गया है । इसके अलावा कुछ संवेदनशील जिलों को भी लॉकडाउन के दायरे में ले  आया गया है। लॉक़ाउन  निश्चित रुप से इस संकट से निपटने की दिशा में बड़ा हथियार है, लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक शीर्ष विशेषज्ञ का मानना है कि लॉकडाउन  कोरोना वायरस  से निपटने का स्थायी हल नहीं है।विश्व स्वास्थ्य संगठन के शीर्ष आपातकालीन विशेषज्ञ माइक रयान ने कहा है कि कोई देश कोरोनोवायरस को हराने के लिए अपे लोगों को घरों में बंद करके इस समस्या से नहीं निपट सकते । उनका मानना है कि यह वायरस दोबारा पनप सकता है और इसका पआसार कभी भी हो सकता है।  इसलिए   वायरस के खतरे से  बचने के लिए ठोस सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों की आवश्यकता  है।एंड्रयू मार ने कहा है कि लॉकडाउन के बाद कभी भी यह बीमारी दोबारा उभर सकती है। उन्होंने कहा कि “हमें वास्तव में जिस पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है वह यह है कि जो लोग बीमार हैं, जिनके पास वायरस है, और उन्हें अलग करना, उनके संपर्कों को ढूंढना और उन्हें अलग करना है । इसके अलावा स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत किए जाने की भी जरुरत है।

लॉकडाउन का क्या है मतलब ?

क्या लॉकडाउन से लोग बच जाएंगे? यह तस्वीर लॉकडाउन में गाजियाबाद की वसुंधरा की तस्वीर है।
जनता कर्फ्यू के दिन गोरखपुर में पसरा रहा सन्नाटा

किसी शहर को लॉकडाउन करने का मतलब होता है कि इस दौरान कोई भी शख्स घर से बाहर नहीं निकल सकता है। हालांकि, इसके अपवाद भी हैं। मसलन, दवा, बैंक, अस्पताल और राशन-पानी की जरूरत के लिए घर से बाहर निकलने की छूट मिलती है। लॉकडाउन एक तरह से आपातकाल व्यवस्था होती है। अगर किसी शहर या इलाके में लॉकडाउन की घोषणा होती है तो वहां के लोगों को घरों से निकलने की इजाजत नहीं होती है। लॉकडाउन की स्थिति में किसी भी शख्स को जीवन जीने के लिए बुनियादी और आवश्यक चीजों के लिए ही बाहर निकलने की इजाजत होती है। लॉकडाउन में अगर किसी को राशन, दवा-पानी, सब्जी की जरूरत है तो वह बाहर जा सकता है या फिर बैंक-अस्पताल के काम के लिए अनुमति मिल सकती है।(Union Health Minister के Assistant Private Secretary उदय चंद्र सिंह, जो एनडीटीवी के संस्थापक पत्रकार रहे, के सौजन्य से)

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